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मधुमेह में एहतियात है बहुत जरुरी | symptoms of Diabetes

डायबिटीज/मधुमेह में इन्हें आजमाएं और राहत पाएं :

DIABETES

मधुमेह चयापचयी विकारों से पनपने वाला रोग है जो शरीर की इन्सुलिन पैदा करने या इन्सुलिन का उपयोग करने की क्षमता को प्रभावित करता है। आंकड़ों की मानें तो भारत में ये रोग पूरी दुनिया के मुकाबले तेज़ी से बढ़ रहा है। युवाओं में इस रोग की बढ़ती तादाद से परेशान डॉक्टर इससे लड़ने की नई तकनीकों की तलाश में हैं। जिन्हें डायबिटीज होती है उन्हें खाने – पीने का खास ख्याल रखना पड़ता है ! डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए नियमित दिनचर्या और पोषणयुक्‍त आहार की जरूरत होती है ! ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें डायबिटीज के रोगी खा सकते हैं … !

1.इसमें छुपा है ढेर सारा फाइबर … !

डायबिटीज है तो आप बींस आराम से खा सकते हैं ! बींस – मसूर – मटर – राजमा आदि खाने पर आपको ढेर सारा फाइबर मिलेगा ! रोजाना के भोजन में बीन्स और मसूर की दाल को शामिल कर लेना टाइप टू डायबिटीज से पीडि़त लोगों के लिए लाभकारी रहता है !
मधुमेह की काट करती है बीन्स ! बीन्स में प्रोटीन – कार्बोहाइड्रेट – विटामिन सी तथा कैल्शियम – फॉस्फोरस – आयरन – कैरोटीन – थायमीन – राइबोफ्लेविन – नियासीन आदि अनेक तरह के मिनरल और विटामिन मौजूद होते हैं ! इसमें सोडियम की मात्रा कम तथा पोटेशियम व मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है – जो सेहत के लिए लाभदायक है ! बीन्स लेने से कब्ज की शिकायत नहीं होती – पेट भी साफ रहता है ! इसमें मौजूद फाइबर ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखता है !

2. सूखे …. ! लेकिन गुणों से भरपूर !!

मेवों में फाइबर – स्‍वस्‍थ वसा और मैगनीशियम होता है ! मेवे खाने से पेट भी लंबे समय तक भरा रहता है – अखरोट में फाइबर – विटामिन बी – मैग्‍नीशियम और एंटी आक्सिडेंट्स अधिक मात्रा में होते हैं ! इसको खाने से मधुमेह की बीमारी दूर रहती हैं ! डायबिटीज फाउंडेशन और नेशनल डायबिटीज, ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन के हालिया शोध में हृदय संबंधी रोगों व मधुमेह में पिस्ते को लाभकारी पाया गया है ! मेवों में वसा बहुत ज्यादा होने के बावजूद ये डायबिटीज जैसी कई गंभीर बीमारियों के जोखिम कम करने में मददगार होते हैं ! काजू टाइप 2 डायबिटीज रोकने में मददगार होता है !

3. लेडी फिंगर करती है डायबिटीज की काट …. !
भिन्डी का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद होता हैं । यह रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करती है । इसमें से एक चिपचिपा रस निकलता है जो कि शरीर में ग्‍लूकोज लेवल को कंट्रोल करता है! मधुमेह के रोगियों को भिंडी की अधकची सब्जी फायदा करती है – भिंडी विटामिन, खनिज, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर का अच्छा स्रोत है ! इसमें कैल्शियम, पोटेशियम, लोहा, मैग्नीशियम, मैंगनीज और फास्फोरस जैसे मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं !

4. ब्लड शुगर लेवल रहता है कंट्रोल में ….. !
गेहूं में बहुत सारा रेशा तथा विटामिन बी कॉम्प्‍लेक्‍स होता है, जो पाचन शक्‍ति को मजबूत बनाता है ! इसलिये साबुत वीट ब्रेड – रोटी या गेहूं के आटे से बना कोई भी व्‍यंजन शुगर लेवल को कंट्रोल में रखता है ! ओट्स – गेहूं या बाजरा हो – इन सभी में फाइबर – विटामिन ई – बी ~ आयरन – मैगनीशियम और सेलिनियम होता है !

साबुत अनाज का ग्लाइसैमिक इंडैक्स सफेद आटे के मुकाबले ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करता है – एक नवीनतम शोध के अनुसार जो व्यक्ति साबुत अनाज का सेवन करते हैं उन्हें मधुमेह होने की संभावना कम होती है – शोध में पाया गया कि साबुत अनाज खाने वालों में इंसुलिन सेंस्टिविटी बेहतर पाई गई !

ये नुस्खा जरूर अपनाएं
तुलसी के पत्ते: तुलसी के पत्तों में ऐन्टीआक्सिडन्ट और ज़रूरी तेल होते हैं जो इजिनॉल, मेथिल इजिनॉल और कैरियोफ़ैलिन बनता है। ये सारे तत्व मिलकर इन्सुलिन जमा करने वाली और छोड़ने वाली कोशिकाओं को ठीक से काम करने में मदद करते हैं। इससे इन्सुलिन की संवेदनशीलता बढ़ती है। एक और फ़ायदा ये है कि पत्तियों में मौजूद ऐन्टीआक्सिडन्ट आक्सिडेटिव स्ट्रेस संबंधी कुप्रभावों को दूर करते हैं।

नुस्खा: शुगर लेवल को कम करने के लिए दो से तीन तुलसी के पत्ते खाली पेट लें, या एक टेबलस्पून तुलसी के पत्ते का जूस लें।

पटसन के बीज: इनमें फाइबर सामग्री बहुल मात्रा में पाई जाती है जो पाचन में तो मदद करते ही हैं साथ ही फैट और शुगर के अवशोषण में भी सहायक होते हैं। पटसन के बीज खाने से मधुमेह से ग्रसित मरीजों में शुगर की मात्रा 28 प्रतिशततक कम होती है।

नीलबदरी के पत्ते: मधुमेह को रोकने के लिए इसका इस्तेमाल आयुर्वेद में सदियों से हो रहा है. जर्नल ऑफ़ न्यूट्रीशन ने कहा है कि इसकी पत्तियों में एंथोसियानीडीनस भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो चयापचय की प्रक्रिया और ग्लूकोज़ को शरीरके विभिन्न भागों में पहुंचाने की प्रक्रिया को समृद्ध करता है। अपने इस ख़ास गुण के कारण नीलबदरी के पत्ते ब्लड शुगरलेवल को कम करने में काफी कारगर होते हैं।

दालचीनी: ये इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारने के साथ-साथ ब्लड ग्लूकोज़ लेवल को भी कम करता है। अगर सिर्फ आधी चम्मच दालचीनी रोज़ ली जाए तो इन्सुलिन की संवेदनशीलता को सुधारा और अपने वज़न को नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे ह्रदय संबंधी रोगों का खतरा कम हो जाता है।
नुस्खा: लगभग एक महीने के लिए अपने रोज़ के आहार में एक ग्राम दालचीनी का इस्तेमाल करें, इससे ब्लड शुगर लेवल को कम करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन टी: ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं जो एक मज़बूत एंटी-ऑक्सीडेंट और हाइपो-ग्लाइसेमिक तत्व हैं, इससे ब्लड शुगर को रिलीज़ करने में मदद मिलाती है और शरीर इन्सुलिन का सही तरह से इस्तेमाल कर पाता है।

सहजन के पत्ते: इसे मोरिंगा भी कहते हैं, इसके पत्तों में इसमें दूध की तुलना में चार गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है। मधुमेह के मामलों में इन पत्तों के सेवन से भोजन के पाचन और रक्तचाप को कम करने में मदद मिलती है।
इसबगोल: पानी में मिलने के बाद इसबगोल की भूसी ‘जेल’ जैसा तत्व बनाती है जिसका सेवन ब्लड ग्लूकोज़ के अवशोषण और भोजन के पाचन को सुगम बनाता है। ये अल्सर और एसिडिटी से भी बचाता है।

करेला: करेले में इन्सुलिन-पोलिपेपटाइड होता है, ये एक ऐसा बायो-कैमिकल तत्व है जो ब्लड-शुगर को कम करने में उपयोगी है।
नुस्खा : हर हफ्ते कम से कम एक बार करेले की सब्जी या कढी ज़रूर लें. अगर आप जल्द असर चाहते हैं तो तीन दिनमें एक बार खाली पेट करेले का जूस लें।

नीम: देश में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नीम के पत्ते स्वाद में कडवे होते हैं पर इनमें बहुत सी खासियतें हैं। नीम इन्सुलिन रिसेप्टर सेंसिटिविटी बढाने के साथ साथ शिराओं व धमनियों में रक्त प्रवाह को ठीक करता है और हाइपो ग्लाय्केमिक ड्रग्स पर निर्भर होने से बचाता है।
नुस्खा: बेहतर नतीजों के लिए नीम के पत्तों का जूस रोज़ सुबह खाली पेट लें।
काला जामुन: ये ब्लड-शुगर को कम करने में मदद करता है और ह्रदय संबंधी बीमारियों से शरीर को दूर रखता है।

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